Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2024 :नेता जी सुभाषचंद्र की प्रेरणादायक बात

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Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2024 हेलो दोस्तों जैसा की आप सब जानते है की आजका दिन बहुत खास है आज के दिन नेता जी शुभाषचंद्र बॉस का जन्म हुआ था ! इनकी महानता की यादें आज भी पूरा देश करता है आज हम आपको इनके बारे में बताने जा रहे !

Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2024

Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2024 :नेता जी सुभाषचंद्र की प्रेरणादायक बात 2024

भारत मां के वीर सपूत नेताजी सुभाष की जन्मजयंती है। देश पराक्रम दिवस के रूप में इस प्रेरणा दिवस को बनाता है। नेताजी सुभाष। जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया। जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था, मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आजाद सरकार को स्थापित किया। उन्होंने मातृभूमि के कण कण को अपना सब कुछ माना। उन्होंने भारत मां की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।

देश का ऐसा कोई हिस्सा नहीं है जो नेताजी को नमन न कर रहा हो। उनकी विरासत को संजो न रहा। सभी देशवासियों को पराक्रम दिवस की अनेक अनेक शुभकामनाएं। उनके नारों में जोश था, खून में उबाल था। वे जहां जहां जाते कारवां बनाते। 23 जनवरी साल 1897 को नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म ओडिशा के कटक में हुआ था। वे भारत में स्वतंत्रता संग्राम के महानायक रहे। नेताजी ने जय हिन्द का नारा दिया। उनके अविस्मरणीय योगदान का देश आज भी कर्जदार है। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देने वाले नेताजी का भारत के आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। नेताजी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला। Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2024

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इस दौरान उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फौज का गठन किया। इसके साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में उन्होंने आजाद हिन्द सरकार का गठन किया। उनका सम्पूर्ण जीवन हर युवा और भारतीय के लिए आदर्श है। नेताजी ने आजादी की जंग में शामिल होने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा का परित्याग कर दिया और इंग्लैंड से भारत वापस लौट आए। साल दो हज़ार 21 में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। उसके बाद से भारत उनकी जयंती को हर साल पराक्रम दिवस के रूप में मना रहा है।

 

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